बहाई उपासना मंदिर में पर्यावरण सम्बंधी कई पहलों को कार्यान्वित किया गया है जिनसे जैव-विविधता के संरक्षण, संसाधनों के संरक्षण एवं पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा के प्रयोग की दिशा में उल्लेखनीय योगदान प्राप्त होता है। इनमें से कई कार्य स्थानीय समुदायों तथा सरकारी एवं गैर-सरकारी संगठनों की सहायता से किए गए हैं।

बहाई उपासना मंदिर में,उद्यानों के लिए पानी की व्यवस्था करना एक चुनौतीपूर्ण काम था और इसलिए, सबसे पहले, वर्षाजल को ’हार्वेस्ट’ करने की सुविधाएं स्थापित की गईं। उसके बाद, नगर निगम के अपशिष्ट जल के शोधन के लिए एक मलजल शोधन संयंत्र लगाया गया। यदि ऐसा न किया गया होता तो यह अपशिष्ट जल प्रदूषण का कारण बनता। इन प्रयासों के कारण पर्याप्त पानी मिलने लगा जिनसे इन उद्यानों को हरा-भरा रखने में सहायता मिलती है। एक वर्मिकंपोस्टिंग प्रणाली भी स्थापित की गई जहां बगीचे के अपशिष्टों (खास तौर पर कटी-छंटी घास) को कतारों में रखा जाता है और उन्हें फायबर की एक चादर से ढंक दिया जाता है। उसके बाद कतारों पर कीड़े छिड़क दिए जाते हैं और कतारों को गीला रखा जाता है। समय आने पर, कीड़ों की संख्या बढ़ जाती है और बगीचे के अपशिष्ट पोषक खाद में बदल जाते हैं जिन्हें उर्वरक के रूप में पुनः उद्यान में ही इस्तेमाल किया जाता है।

बाद में, बिजली की आपूर्ति के लिए पूरक स्रोत के रूप में सोलर पैनल संस्थापित किए गए। इस प्रयास के कारण बिजली के खर्चों में ४५ प्रतिशत तक की कमी आई है।