दिसंबर १९८६ में बहाई उपासना मंदिर को जनता के लिए खोल दिया गया। तब से प्रतिदिन हजारों लोग ’कमल मंदिर’ आते हैं। एक ओर जहां आगंतुक उस प्रशांत वातावरण को पसंद करते हैं जो ध्यान के लिए अनुकूल है वहीं दूसरी ओर बहुत से लोग उस ’स्रोत’ की तलाश करते हैं जिसने ऐसे उपासना-स्थल की प्रेरणा दी। परिणामस्वरूप, ऐसे लोगों के लिए एक ’सूचना केंद्र’ का निर्माण किया गया जो बहाई उपासना मंदिर और बहाई धर्म के बारे में ज्यादा कुछ जानना चाहते हैं।

सूचना केंद्र अत्याधुनिक विनिर्देशनों के अनुसार निर्मित किया गया है और वहां फोटो पैनल्स, लिखित पाठों और फिल्मों इत्यादि के माध्यम से बहाई धर्म के विविध पहलुओं पर जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। इस केंद्र में एक आगंतुक दीर्घा (विज़िटर्स गैलरी) भी है जो बहाई धर्म के इतिहास, उसके विचार-दर्शन तथा दुनिया भर के बहाइयों द्वारा संचालित सामाजिक-आर्थिक विकास कार्यक्रमों पर केंद्रित है।

इस केंद्र में ४०० से भी अधिक लोगों के बैठने की क्षमता के साथ एक विशाल ऑडिटोरियम तथा दो ७०-सीटर ऑडिटोरियम भी हैं। ऑडिटोरियम में बहाई उपासना मंदिर और बहाई धर्म के बारे में फिल्में दिखाई जाती हैं। साथ ही उसका उपयोग सद्भावपूर्ण एवं सकारात्मक सामाजिक संदेश वाले कार्यक्रमों/संगीत आयोजनों के लिए भी किया जाता है। ऐसे कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य कला के माध्यम से एकता को प्रोत्साहित करना है।

इसके अतिरिक्त, विगत कई वर्षों से, सामाजिक परिसंवादों में अपनी भागीदारी निभाकर बहाई समुदाय सभ्यता के विकास में भी अपना योगदान देने के लिए प्रयासरत रहा है। ’सूचना केंद्र’ स्त्री-पुरुष की समानता, समाज में धर्म को जो रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए, तथा समाज को बेहतर बनाने की दिशा में मीडिया द्वारा निभाए जा सकने वाले दायित्व, इत्यादि अनेक विषयों पर परिसंवाद जारी रखने के लिए एक स्थान के रूप में अपनी सेवा दे रहा है।

सूचना केंद्र सोमवार से शनिवार तक खुला रहता है। सुबह: ९ :00 बजे से १२:00 बजे तक
शाम: २:00 बजे से ५:00 बजे तक

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