“बहाउल्लाह द्वारा प्रतिपादित मूलभूत सिद्धांत यह है है कि … धार्मिक सत्य परमपूर्ण नहीं बल्कि सापेक्ष है, कि ’दिव्य प्रकटीकरण’ सतत एवं प्रगतिशील रूप से चलने वाली प्रक्रिया है, कि दुनिया के सभी धर्म एक ही दिव्य स्रोत से उत्पन्न हुए हैं, कि उनके मूल सिद्धांत पूर्णतः एक-दूसरे से तालमेल में होते हैं, कि उनकी शिक्षाएं एक ही सत्य के पहलू हैं….”

– बहाई लेखों से

बहाई यह मानते हैं कि सभी धर्मों की नींव एक है। मानवजाति के पास आने वाले सभी प्रकटावतार एक ही ’दिव्य स्रोत’ से आए हैं और वे सब मानवजाति को शिक्षित करने के समान उद्देश्य को पूरा करते हैं। यह सत्य है कि सभी धर्मों का अपना-अपना अलग इतिहास और भिन्न भौगोलिक पृष्ठभूमि रही है किंतु सभी धर्मों की आध्यात्मिक एवं नैतिक शिक्षाओं का सार-तत्व एक ही है। सभी धर्म मनुष्य की प्रकृति में निहित नैतिक एवं आध्यात्मिक क्षमताओं को विकसित करने और ऐसे समाजों का निर्माण करने के उद्देश्य से ही आए हैं जिनमें ये क्षमताएं फलीभूत हो सकें और उन्हें समाज के कल्याण को उन्नत बनाने की दिशा में उन्मुख किया जा सके। हालांकि बदलती हुई परिस्थितियों और ऐतिहासिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, विभिन्न धर्मों की सामाजिक शिक्षाओं, विधि-विधानों और रीतियों में अंतर पाया जाता है लेकिन अंततः उन्हें मानवजाति की सामूहिक परिपक्वता को सुविकसित करने के समान उद्देश्य को पूरा करने वाले तत्वों के रूप में देखा जा सकता है। धर्मों की अनिवार्य एकता की यह समझ हमें वह आधार प्रदान करती है जिसपर सभी धर्मों के लोग सभ्यता के विकास की दिशा में प्रयत्न करने के लिए एक साझी आध्यात्मिक विरासत से प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं।

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