“अस्तित्व के संसार में प्रार्थना से अधिक मधुर और कुछ भी नहीं है …. प्रार्थना और अनुनय की स्थिति सबसे आशीर्वादित अवस्था है।”

– बहाई लेखों से

मनुष्य एक आध्यात्मिक प्राणी है। जिस तरह हमारे शरीर को अपने समुचित विकास के लिए पोषण की आवश्यकता होती है वैसे ही अपने आध्यात्मिक जीवन और स्वास्थ्य के लिए हमें नियमित प्रार्थना की आवश्यकता होती है। प्रार्थना आत्मा का भोजन है। यह हमारे हृदयों में ईश्वर के प्रेम को प्रगाढ़ बनाती है और हमें उसके निकट लाती है। बहाई लेखों में कहा गया है: “अस्तित्व के संसार में प्रार्थना से अधिक मधुर और कुछ भी नहीं है …. प्रार्थना और अनुनय की स्थिति सबसे आशीर्वादित अवस्था है।… यह आध्यात्मिकता, सजगता और स्वर्गिक अनुभूतियों का सृजन करती है, प्रभु-साम्राज्य के नए-नए आकर्षणों को जन्म देती है और उच्चतर प्रज्ञा के प्रति सुग्राह्यता उत्पन्न करती है।“ प्रार्थना की स्थिति में रहने का मतलब यह नहीं है कि केवल भक्ति-भावना के क्षणों में हम पवित्र श्लोकों का उच्चारण करें, बल्कि यह कि अपने दिनभर के कार्यकलापों में भी हम परमात्मा की ओर उन्मुख रहें।

अपने उच्चतम रूप में, प्रार्थना ईश्वर के प्रति स्नेहपूर्ण स्तुति की पावन अभिव्यक्ति है। “प्रार्थना करते समय, सच्चे आराधक को ईश्वर से अपनी इच्छाओं और कामनाओं को पूरा करने की याचना करने के लिए ही प्रयत्नशील नहीं रहना चाहिए बल्कि उन इच्छाओं को समंजित करने और उन्हें ’दिव्य इच्छा’ के अनुरूप बनाने के लिए। केवल ऐसी ही मनोवृत्ति के माध्यम से व्यक्ति को आंतरिक शांति और संतुष्टि का बोध हो सकता है जो प्रार्थना की शक्ति से ही संभव है।“ तथापि, यह भी स्वाभाविक है कि हम अक्सर ईश्वर से सहायता की याचना भी करेंगे। ऐसी प्रार्थना के बाद, हम मनन करेंगे और जो भी सबसे अच्छा मार्ग प्रतीत होगा उसका अनुसरण करेंगे और देखेंगे कि क्या हमारे प्रयासों को संपुष्टि प्राप्त हुई है। हमें परमेश्वर की करुणा में पूर्ण विश्वास रखना चाहिए और यह सुनिश्चित मानना चाहिए कि वह हमें वह प्रदान करेगा जो हमारे लिए सर्वोत्तम होगा।

हे परमेश्वर! यह वर दे कि एकता की ज्योति सारी पृथ्वी पर छा जाए और “साम्राज्य प्रभु का है” यह मुहर इसके सभी लोगों के ललाट पर अंकित हो जाए।

— बहाउल्लाह

हे मेरे ईश्वर! मेरे परमेश्वर! अपने सेवकों के हृदयों को मिलाकर एक कर दे और उन पर अपना महान उद्देश्य प्रकट कर। वे तेरी शिक्षाओं पर चलें और तेरे नियमों पर अटल रहें। हे ईश्वर! उनके प्रयास में तू उनकी सहायता कर और उन्हें अपनी सेवा करने की शक्ति प्रदान कर। हे ईश्वर! उन्हें उनके स्वयं के ऊपर न छोड़; उनके पगों का, अपने ज्ञान के प्रकाश द्वारा मार्गदर्शन कर और उनके हृदयों को अपने प्रेम से आनंदित कर दे। सत्य ही, तू उनका सहायक और स्वामी है।

बहाउल्लाह

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