“परमात्मा का स्मरण वर्षा और ओस की तरह है जिनसे फूलों और बहारों को ताजगी और कृपा प्राप्त होती है, उनमें नवजीवन का संचार होता है और वे सुरभि एवं नूतन आकर्षण से सम्पन्न होते हैं।”

– बहाई लेखों से

नई दिल्ली (भारत) में स्थित और “कमल मंदिर” के नाम से प्रसिद्ध, बहाई उपासना मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट में आपका स्वागत है। दुनिया के आठ उपासना मंदिरों की तरह, यह भव्य संरचना भी मानवजाति की एकता के सिद्धांत के प्रति समर्पित है। इसके पावन परिसर में प्रार्थना और ध्यान के लिए सभी जाति, धर्म और राष्ट्रीय पृष्ठभूमियों के लोगों का स्वागत है। प्रेमपूर्ण सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए, यह समाज का एक सामुदायिक केंद्र है जिसके दायरे में हर किसी को समान माना जाता है। यह मंदिर एकमेव सत्य ईश्वर को समर्पित है जिसने समस्त मानवजाति और इस सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की है।

बहाई धर्म के लेखों में कहा गया है कि हालांकि ईश्वर को उसके परम सार-स्वरूप में कोई नहीं जान सकता किंतु मानवजाति को सुशिक्षित करने और उसे अपना मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए वह युगों-युगों से एक के बाद एक दिव्य संदेशवाहकों, अवतारों या प्रकटावतारों को भेजता आया है।

उपासना मंदिर व्यक्तियों और समुदायों के जीवन में प्रार्थना के महत्व पर जोर देता है। इस इच्छा की अभिव्यक्ति के लिए वह एक स्थान उपलब्ध कराता है जहां वे प्रार्थना के माध्यम से अपने सृजनकर्ता परमेश्वर के साथ वार्तालाप कर सकते हैं। प्रार्थना को “अपने रचयिता परमात्मा के साथ आत्मा का प्रत्यक्ष एवं अबाधित अनिवार्य आध्यात्मिक संलाप” कहा गया है। साथ ही, उपासना मंदिर सामूहिक उपासना को आध्यात्मिक एवं भौतिक रूप से समृद्ध सामुदायिक जीवन-पद्धति का एक बुनियादी तत्व मानता है। इसके अलावा, उपासना मंदिर की भक्तिपरक सेवाएं व्यापक प्रकृति की होती हैं जिनमें ईश्वर के शब्दों को अपने मनो-मस्तिष्क में हृदयंगम करके उच्चता की स्थिति प्राप्त करने के लिए हर किसी का स्वागत है।

हालांकि ईश्वर की आराधना बहाई उपासना मंदिर का प्रमुख तत्व है किंतु मानवजाति की सेवा को उस आराधना से प्रतिफलित आंतरिक रूपांतरण की वाह्य अभिव्यक्ति माना जाता है। इस सेवा की अभिव्यक्ति ऐसे कर्मों के माध्यम से होती है जो मानवजाति की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सेवा की भावना से किए जाते हैं। साथ ही उसे घरों तथा पास-पड़ोस और गांवों में की जाने वाली सामुदायिक उपासना, दूसरों की सेवा करने की क्षमता का निर्माण करने वाली शैक्षणिक प्रक्रिया, तथा मानवजाति की एकता के सिद्धांत को निरूपित करने वाले सामुदायिक जीवन के ताने-बाने के माध्यम से भी अभिव्यक्त किया जाता है। इस तरह, बहाई उपासना मंदिर की संकल्पना सामाजिक, वैज्ञानिक एवं मानवतावादी सेवाओं के एक केंद्र के रूप में की जाती है। इन कार्यों के अनुरूप ही, उपासना मंदिर को “परमात्मा के स्मरण का उदय-स्थल” कहा जाता है।

बहाई उपासना मंदिर का लोकार्पण १९८६ में किया गया था और यह भारत के बहाइयों की राष्ट्रीय आध्यात्मिक सभा के स्वामित्व में है।

उपासना और सेवा

बहाई धर्म के आधारभूत सिद्धांतों का एक परिचय

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मंदिर और समुदाय

समुदाय की आध्यात्मिक, सामाजिक और भौतिक प्रगति का केंद्र

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भवन-शिल्प

डिज़ाइन की अवधारणा, इसके तत्व और एक ऐतिहासिक समयावधि

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